ABLAK GHODE SUWAAR
अब्लक़ घोड़े सुवार

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Rs. 10.00
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इसाले सवाब के बारे में हदीसों की रौशनी में
अपने मरहूमीन के लिये नेक काम करके उसका सवाब पहुँचाना इस्लाम में साबित है। सदक़ा, कुरआन शरीफ़ की तिलावत, दीन की किताबें तकसीम करना और इल्मी फायदे पहुँचाना—all ये ऐसे अमल हैं जिनका सवाब मरहूमीन को पहुँचता है।
Sahih Muslim में है कि एक सहाबी ने अर्ज़ किया:
“या रसूलल्लाह ﷺ! मेरी वालिदा का इंतिकाल हो गया है, अगर मैं उनकी तरफ़ से सदक़ा करूँ तो क्या उन्हें फायदा पहुँचेगा?”
तो नबी-ए-करीम ﷺ ने फ़रमाया:
“हाँ।”
इसी तरह Sahih al-Bukhari में है कि नबी ﷺ ने फ़रमाया:
“जब इंसान मर जाता है तो उसके अमल बंद हो जाते हैं, मगर तीन चीज़ों का सवाब जारी रहता है: सदक़ा-ए-जारीया, ऐसा इल्म जिससे फायदा उठाया जाए, और नेक औलाद जो उसके लिये दुआ करे।”
रिसाला “अब्लक घोड़े सुवार” जो कुर्बानी के मसाइल पर लिखा गया है, उसे अवाम में तकसीम करवाना इंशाअल्लाह सदक़ा-ए-जारीया और इसाले सवाब का बेहतरीन ज़रिया है। इससे लोगों को दीन की सही मालूमात हासिल होंगी और उसका सवाब आपके मरहूमीन तक पहुँचता रहेगा।
अपने मरहूमीन के इसाले सवाब के लिये यह रिसाला अवाम में तकसीम करवाइये और सवाबे जारिया हासिल कीजिये।

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